एक प्रश्न है तुम्हारे लिए...
देखा ही नहीं... मैने सुना है तुम्हे...
और छू कर बहुत सोचा है तुम्हे...
बिजली से चंचल आँधी से तेज़...
बताओ तो... तुम कौन हो?
हर पल डरता था ऊर्ज़ा से तुम्हारी...
कि झुलस ना जाऊं पास आकर तुम्हारे...
पर तुमसे जानकार भी ना हुआ परहेज़...
अब बताओ भी... तुम कौन हो?
सिर्फ़ चँद महीनो की उन बातों मे...
पूंछ लिया तुमने मेरा संसार...
इस धरती की रफ़्तार से भी तेज़...
बताओ ना... तुम कौन हो?
तुमसे तो इतना मिला जुला हूँ...
बार बार सपनो मे भी देखा है
इतनी पहचानी होकर भी अनजानी सेज...
बताओ... तुम कौन हो?
पल मे आई... पल मे चली गयी
करके वीराना मेरा वज़ूद...
अपने रंग मे छोड़ गयी ओ रंगरेज़
अब तो बताओ... तुम कौन हो?
अभी तक भी नहीं उभरा हूँ...
नयी - पुरानी तुम्हारी यादों से...
विवश हो जिसकी हर बात ली मैने सहेज...
अब बस बताओ... तुम कौन हो?
देखा ही नहीं... मैने सुना है तुम्हे...
और छू कर बहुत सोचा है तुम्हे...
बिजली से चंचल आँधी से तेज़...
बताओ तो... तुम कौन हो?
हर पल डरता था ऊर्ज़ा से तुम्हारी...
कि झुलस ना जाऊं पास आकर तुम्हारे...
पर तुमसे जानकार भी ना हुआ परहेज़...
अब बताओ भी... तुम कौन हो?
सिर्फ़ चँद महीनो की उन बातों मे...
पूंछ लिया तुमने मेरा संसार...
इस धरती की रफ़्तार से भी तेज़...
बताओ ना... तुम कौन हो?
तुमसे तो इतना मिला जुला हूँ...
बार बार सपनो मे भी देखा है
इतनी पहचानी होकर भी अनजानी सेज...
बताओ... तुम कौन हो?
पल मे आई... पल मे चली गयी
करके वीराना मेरा वज़ूद...
अपने रंग मे छोड़ गयी ओ रंगरेज़
अब तो बताओ... तुम कौन हो?
अभी तक भी नहीं उभरा हूँ...
नयी - पुरानी तुम्हारी यादों से...
विवश हो जिसकी हर बात ली मैने सहेज...
अब बस बताओ... तुम कौन हो?
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