Thursday, April 2, 2009

मान्या...


मान्या...
तुम मेरी प्रेयसी एक आभास मधुरता का
विश्वास, जीवन में घुलते अपनेपन का
सुबह होते ही होता एक मंद मादक अहसास
कि तुम मेरे पास हो संलिप्त मेरी बाँहों में
फिर तुम्हे ही देखता जानता और सोचता मै
एक चुम्बन तुम्हारे होठों पे रसभरी से मीठा
और वो प्रणय आलिंगन कमल सरीखा
भर देता मुझ में हर्ष आनंद अपार  
सच में मान्या...
तुम मेरी प्रेयसी एक आभास मधुरता का

No comments: